Sunday, 3 April 2016

चलती है काले धंधों की कैंची,
कटती हैं जेबें बाजार में,
गूंगी है परजा बहरा है राजा,
धांधल मची है संसार में,
अंधेर नगरी चौपट राजा,
मरघट में बाजे शादी का बाजा,
इस चौपट नगरी की भैया,
हर एक रीत है खोटी,
दूध से महंगा पानी है भैया,
जान से महंगी रोटी,
किसी के पास हैं शाल दुशाले,
किसी के पास लंगोटी,
पेट किसी का पिचका पिचका,
तोंद किसी की मोटी,
मतलब लंबा चौडा है पर,
बात है मेरी छोटी,
मतलब समझ ले बातों पे ना जा,
अंधेर नगरी चौपट राजा,
मैं हूँ भगवान को खास बंदो,
मेरो धंधो है सेवा को धंधो,
नहीं मन में कोई ध्यान गंदो,
कर्ज देता हूँ जैसे हो चंदो,
तेरा फंदा है रेशम का फंदा,
तेरा धंधा है चोरो का धंधा,
जो भी फंस जाए ईश्वर का बंदा,
फेर देता है गर्दन पे रंदा,
यहाँ झूठों के सिर पे ताज है,
यहाँ गुंडों के हाथों में राज है,
यहाँ ठगते हैं भगवन को बंदो,
पूजा की थाली रिश्वत का खाजा,
अंधेर नगरी चौपट राजा,