तेरी निगाह मेरे गम की पासदार सही,
मेरी निगाह में गम ही नहीं कुछ और भी है,
मेरी निगाह में गम ही नहीं कुछ और भी है,
नये जहान बसाए हैं फिक्रे आदम ने,
अब इस जमीं पे अदम ही नहीं कुछ और भी है,
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साहिर
गम की पासदार: दर्द का लिहाज करने वाली,
फिक्रे आदम: इंसान की सोच ,अदम:नरक,
अब इस जमीं पे अदम ही नहीं कुछ और भी है,
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साहिर
गम की पासदार: दर्द का लिहाज करने वाली,
फिक्रे आदम: इंसान की सोच ,अदम:नरक,