Tuesday, 4 August 2015


प्यार कर लिया तो क्या,प्यार है ख़ता नहीं,
तेरी मेरी उम्र में,  किसने ये किया नही,

तेरे होंठ मेरे होंठ मिल गए तो क्या हुआ,
दिल की तरह जिस्म भी खिल गए तो क्या हुआ,

इससे पहले ये सितम,क्या कभी हुआ नहीं,
प्यार कर लिया तो क्या,प्यार है ख़ता नहीं,

तू भी होशमन्द है,मैं भी होश मन्द हूँ,
उस तरह जिंएगे हम जिस तरह पसंद है,

उनकी बात क्या सुनें जिनसे वास्ता नहीं,
प्यार कर लिया तो क्या,प्यार है ख़ता नहीं,

रस्म क्या रिवाज़ क्या,धर्म क्या समाज क्या,?
दुश्मनों का खौफ क्यों,दोस्तों की लाज क्या ?

ये वो शौक़ है कि जिससे कोई भी बचा नहीं,
प्यार कर लिया तो क्या,प्यार है ख़ता नहीं,

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