Wednesday, 15 March 2017

तेरी निगाह मेरे गम की पासदार सही,
मेरी निगाह में गम ही नहीं कुछ और भी है,

नये जहान बसाए हैं फिक्रे आदम ने,
अब इस जमीं पे अदम ही नहीं कुछ और भी है,
......................................................
साहिर
गम की पासदार: दर्द का लिहाज करने वाली,
फिक्रे आदम: इंसान की सोच ,अदम:नरक,

Sunday, 26 February 2017

बने ऐसा समाज,
मिले सबको अनाज,
न हो लूट, न हो फूट, न हो झूट,
तो जी कैसा हो, कैसा हो...
जागे सबका नसीब,
न हो कोई ग़रीब,
मिटे रोग, भूलें सोग, सभी लोग,
तो जी कैसा हो, कैसा हो...
न हो मेहनत पे धन का इज़ारा,
सब करें अपने बल पे गुजारा,
भेद और भाव मिट जाए सारा,
आदमी आदमी को हो प्यारा,
कोई ऊँच और नीच,
न हो दुनिया के बीच,
न हो जात, न हो पात, रहें साथ,
तो जी कैसा हो, कैसा हो...
दीन और धर्म मांगें न चंदे,
एक हो जाएं धरती के बंदे,
टूट जाएं रिवाज़ों के फंदे,
बंद हो जाएं चोरी के धंदे,
मिटे काला बाजार,
पड़े झूठे को मार,
खुले पोल, फटे ढोल, घटे मोल,
तो जी कैसा हो, कैसा हो...
सारे जग में हो सुख का सवेरा,
जाए जुग जुग का बोझल अँधेरा,
कोई झगड़ा न हो तेरा मेरा,
लहर ले शान्ति का सवेरा,
न हो देशों में जंग,
रहें सब एक संग,
बुझे आग मिटे लाग,छिड़े राग,
तो जी कैसा हो, कैसा हो...
साहिर (बहूरानी) 1963
कल नई कोपलें फूटेंगी,
कल नए फूल मुस्काएंगे,
और नई घास के नए फर्श पर,
नए पाँव इठलाएंगे,
वो मेरे बीच नहीं आए,
मैं उनके बीच में क्यों आऊँ,
उनकी सुबहों और शामों का,
मैं एक भी लम्हा क्यों पाऊँ,
मैं पल दो पल का शायर हूँ,
पल दो पल मेरी कहानी है...
...अहले-दिल अहले-मोहब्बत पे इनायत है तेरी,
तूने डूबों को उबारा है, ये शोहरत है तेरी,
अनोखी शान तेरी, निराली आन तेरी,
तू मस्ती का खज़ाना,तेरा हर दिल दीवाना,
तू महबूबे-ख़ुदा है, तू हर ग़म की दवा है,
तभी तो सब कहते है,कहते है,कहते है,
हो के मायूस तेरे दर से, सवाली न गया,
झोलियाँ भर गईं सबकी,कोई खाली न गया,
जमाले-यार देखा है,जमाले-यार देखा,
रुखे-दिलदार देखा है,रुखे-दिलदार देखा,
किसी का नाज़नी जलबा सरे-दरबार देखा,
तमन्नाओं के सहरा में, हसीं-गुलजार देखा,
जब से देखा है तुझे,दिल का अजब आलम है,
जानो-ईमा भी अगर नज़र करूँ, तो कम है,
था जो सुनने में आया, तुझे वैसा ही पाया,
तू अरमानों का साहिल,तू उम्मीदों की मंज़िल,
तू हर बिगड़ी बनाए, तू बिछड़ों को मिलाए,
तभी तो सब कहते हैं,कहते हैं,कहते हैं,
हो के मायूस तेरे दर से, सवाली न गया,
झोलियाँ भर गईं सबकी,कोई खाली न गया