Sunday, 26 February 2017

कल नई कोपलें फूटेंगी,
कल नए फूल मुस्काएंगे,
और नई घास के नए फर्श पर,
नए पाँव इठलाएंगे,
वो मेरे बीच नहीं आए,
मैं उनके बीच में क्यों आऊँ,
उनकी सुबहों और शामों का,
मैं एक भी लम्हा क्यों पाऊँ,
मैं पल दो पल का शायर हूँ,
पल दो पल मेरी कहानी है...

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