बने ऐसा समाज,
मिले सबको अनाज,
न हो लूट, न हो फूट, न हो झूट,
तो जी कैसा हो, कैसा हो...
मिले सबको अनाज,
न हो लूट, न हो फूट, न हो झूट,
तो जी कैसा हो, कैसा हो...
जागे सबका नसीब,
न हो कोई ग़रीब,
मिटे रोग, भूलें सोग, सभी लोग,
तो जी कैसा हो, कैसा हो...
न हो कोई ग़रीब,
मिटे रोग, भूलें सोग, सभी लोग,
तो जी कैसा हो, कैसा हो...
न हो मेहनत पे धन का इज़ारा,
सब करें अपने बल पे गुजारा,
भेद और भाव मिट जाए सारा,
आदमी आदमी को हो प्यारा,
सब करें अपने बल पे गुजारा,
भेद और भाव मिट जाए सारा,
आदमी आदमी को हो प्यारा,
कोई ऊँच और नीच,
न हो दुनिया के बीच,
न हो जात, न हो पात, रहें साथ,
तो जी कैसा हो, कैसा हो...
न हो दुनिया के बीच,
न हो जात, न हो पात, रहें साथ,
तो जी कैसा हो, कैसा हो...
दीन और धर्म मांगें न चंदे,
एक हो जाएं धरती के बंदे,
टूट जाएं रिवाज़ों के फंदे,
बंद हो जाएं चोरी के धंदे,
एक हो जाएं धरती के बंदे,
टूट जाएं रिवाज़ों के फंदे,
बंद हो जाएं चोरी के धंदे,
मिटे काला बाजार,
पड़े झूठे को मार,
खुले पोल, फटे ढोल, घटे मोल,
तो जी कैसा हो, कैसा हो...
पड़े झूठे को मार,
खुले पोल, फटे ढोल, घटे मोल,
तो जी कैसा हो, कैसा हो...
सारे जग में हो सुख का सवेरा,
जाए जुग जुग का बोझल अँधेरा,
कोई झगड़ा न हो तेरा मेरा,
लहर ले शान्ति का सवेरा,
जाए जुग जुग का बोझल अँधेरा,
कोई झगड़ा न हो तेरा मेरा,
लहर ले शान्ति का सवेरा,
न हो देशों में जंग,
रहें सब एक संग,
बुझे आग मिटे लाग,छिड़े राग,
तो जी कैसा हो, कैसा हो...
रहें सब एक संग,
बुझे आग मिटे लाग,छिड़े राग,
तो जी कैसा हो, कैसा हो...
साहिर (बहूरानी) 1963
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