ठण्डी हवाएं लहरा के आएं
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किसी भी क्षेत्र में नए प्रयोगों के लिए लोग आसानी से तैयार नहीं होते हैं। यही कारण था कि उन दिनों फिल्मी गीत भी उसी परंपरागत ढर्रे पर लिखे जा रहे थे।
'ओ जानेवाले बालमवा लौट के आ लौट के आ, जा मैं ना तेरा बालमवा बेवफा बेवफा'
ऐसे में सन 1951 में 'नौजवान' फिल्म के जरिए साहिर ने ठण्डी हवा के शीतल झोंके की तरह फिल्मी गीतों की दुनियाँ में प्रवेश किया । इससे आगे का सफर स्वर्णिम इतिहास का वह दौर है जिसे भुलाया जाना असंभव है। आइए पढ़ते हैं उनका वही गीत ---
'ओ जानेवाले बालमवा लौट के आ लौट के आ, जा मैं ना तेरा बालमवा बेवफा बेवफा'
ऐसे में सन 1951 में 'नौजवान' फिल्म के जरिए साहिर ने ठण्डी हवा के शीतल झोंके की तरह फिल्मी गीतों की दुनियाँ में प्रवेश किया । इससे आगे का सफर स्वर्णिम इतिहास का वह दौर है जिसे भुलाया जाना असंभव है। आइए पढ़ते हैं उनका वही गीत ---
ठण्डी हवाएं, लहरा के आएं
रुत है जवां, उनको यहाँ, कैसे बुलाएं
ठण्डी हवाएं ...
रुत है जवां, उनको यहाँ, कैसे बुलाएं
ठण्डी हवाएं ...
चाँद और तारे, हँसते नज़ारे
मिलके सभी, दिल में सखी, जादू जगायें
ठण्डी हवाएं ...
कहा भी ना जाये, रहा भी ना जाये
तुमसे अगर, मिले भी नज़र, हम झेंप जाएं
ठण्डी हवाएं ...
दिल के फ़साने, दिल ही ना जाने
तुमको सजन, दिल की लगन, कैसे बतायें
ठण्डी हवाएं ...
मिलके सभी, दिल में सखी, जादू जगायें
ठण्डी हवाएं ...
कहा भी ना जाये, रहा भी ना जाये
तुमसे अगर, मिले भी नज़र, हम झेंप जाएं
ठण्डी हवाएं ...
दिल के फ़साने, दिल ही ना जाने
तुमको सजन, दिल की लगन, कैसे बतायें
ठण्डी हवाएं ...
(नौजवान -1951)
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