हमारे देश में बेटी की विदाई एक पिता के लिए क्या है यह एक पिता होकर बेहतर समझा जा सकता है। 'नीलकमल' फिल्म के लिए लिखे साहिर के इस गीत में एक पिता का दर्द ही नहीं देश की आत्मा की पुकार समायी हुई है।
आश्चर्य की बात है कि साहिर आजीवन अविवाहित रहे और फिर चाहे 'कभी कभी' फिल्म के लिए लिखा 'मेरे घर आई एक नन्हीं परी' जैसा अनमोल गीत हो या ये सदाबहार विदाई गीत... उनके कलम के जादू के ही कमाल हैं।
आश्चर्य की बात है कि साहिर आजीवन अविवाहित रहे और फिर चाहे 'कभी कभी' फिल्म के लिए लिखा 'मेरे घर आई एक नन्हीं परी' जैसा अनमोल गीत हो या ये सदाबहार विदाई गीत... उनके कलम के जादू के ही कमाल हैं।
'होठों पे हँसी की धूप खिले,
माथे पे खुशी का ताज रहे,
माथे पे खुशी का ताज रहे,
और ...
'उस द्वार से भी दुख दूर रहे जिस द्वार से तेरा द्वार मिले'
हमारी सर्वे भवन्तु सुखिन: का ही लघु रूप तो है।
आइए पढ़ते सुनते और देखते हैं यह गीत---
हमारी सर्वे भवन्तु सुखिन: का ही लघु रूप तो है।
आइए पढ़ते सुनते और देखते हैं यह गीत---
बाबुल की दुआएं लेती जा,
जा तुझको सुखी संसार मिले,
मैके की कभी ना याद आए,
ससुराल में इतना प्यार मिले,
जा तुझको सुखी संसार मिले,
मैके की कभी ना याद आए,
ससुराल में इतना प्यार मिले,
नाज़ों से तुझे पाला मैंने,
कलियों की तरह फूलों की तरह,
बचपन में झुलाया है तुझको,
बाहों ने मेरी झूलों की तरह,
कलियों की तरह फूलों की तरह,
बचपन में झुलाया है तुझको,
बाहों ने मेरी झूलों की तरह,
मेरे बाग की अय नाजुक डाली,
तुझे हर पल नई बहार मिले,
तुझे हर पल नई बहार मिले,
जिस घर से बंधे हैं भाग तेरे,
उस घर में सदा तेरा राज रहे,
होठों पे हँसी की धूप खिले,
माथे पे खुशी का ताज रहे,
उस घर में सदा तेरा राज रहे,
होठों पे हँसी की धूप खिले,
माथे पे खुशी का ताज रहे,
कभी जिसकी जोत न हो फीकी,
तुझे ऐसा रूप सिंगार मिले,
तुझे ऐसा रूप सिंगार मिले,
बीतें तेरे जीवन की घडियाँ,
आराम की ठंडी छाँव में,
काँटा भी न चुभने पाय कभी,
मेरी लाड़ली तेरे पाँव में,
आराम की ठंडी छाँव में,
काँटा भी न चुभने पाय कभी,
मेरी लाड़ली तेरे पाँव में,
उस द्वार से भी दुख दूर रहे,
जिस द्वार से तेरा द्वार मिले,
जिस द्वार से तेरा द्वार मिले,
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