खुदाऐ बरतर तेरी जमीं पर,
जमीं की खातिर ये जंग क्यों है,
हर एक फतह-ओ-ज़फर के दामन पे,
खूने-इंसा का रंग क्यों है,
जमीं की खातिर ये जंग क्यों है,
हर एक फतह-ओ-ज़फर के दामन पे,
खूने-इंसा का रंग क्यों है,
जमीं भी तेरी है, हम भी तेरे
ये मिल्कियत का सवाल क्यों है,
ये कत्लो -खूँ का रिवाज़ क्यों है,
ये रस्से जंग-ओ-जवाल क्यों है,
ये मिल्कियत का सवाल क्यों है,
ये कत्लो -खूँ का रिवाज़ क्यों है,
ये रस्से जंग-ओ-जवाल क्यों है,
जिन्हें तलब है जहान भर की,
उन्हीं का दिल इतना तंग क्यों है,
ग़रीब माँओं शरीफ बहनों को
अम्नो-इज़्जत की जिन्दगी दे,
उन्हीं का दिल इतना तंग क्यों है,
ग़रीब माँओं शरीफ बहनों को
अम्नो-इज़्जत की जिन्दगी दे,
जिन्हें अता की है तूने ताकत,
उन्हें हिदायत की ऱोशनी दे,
सरों में कब्रो-गुरूर क्यों है,
दिलों के शीशों पे जंग क्यों है,
उन्हें हिदायत की ऱोशनी दे,
सरों में कब्रो-गुरूर क्यों है,
दिलों के शीशों पे जंग क्यों है,
कज़ा के रस्ते पे जाने वालों,
को बच के आने की राह देना,
दिलों के गुलशन उजड़ न जाएं,
मुहब्बतों को पनाह देना,
जहाँ में अपने वफा के बदले,
ये जश्ने तीरो तफंग क्यों है,
को बच के आने की राह देना,
दिलों के गुलशन उजड़ न जाएं,
मुहब्बतों को पनाह देना,
जहाँ में अपने वफा के बदले,
ये जश्ने तीरो तफंग क्यों है,
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