Friday, 9 December 2016

अगर मुझे न मिली तुम तो मैं ये समझूँगा,
कि दिल की राह से होकर खुशी नहीं गुजरी,
अगर मुझे न मिले तुम तो मैं ये समझूँगी,
कि सिर्फ उम्र कटी जिन्दगी नहीं गुजरी,
ग़ज़ल का हुश्न हो तुम,नज़्म का शबाब हो तुम,
सदा-ए-साज़ हो तुम नग्मा-ए-रवाब हो तुम,
जो दिल में सुबह जगाए वो आफ़ताब हो तुम,
अगर मुझे न मिली तुम तो मैं ये समझूँगा,
कि मेरे जहाँ से कोई रोशनी नहीं गुजरी,
फिज़ा में रंग नज़ारों में जान है तुमसे,
मेरे लिए ये जमीं आसमान है तुमसे,
ख्यालो-ख्वाब की दुनिया जवान है तुमसे,
अगर मुझे न मिले तुम तो मैं ये समझूँगी,
कि ख्वाब ख्वाब रहे वेकसी नहीं गुजरी,
बड़े यक़ीन से मैंने ये हाथ माँगा है,
मेरी वफा ने हमेशा का साथ माँगा है,
दिलों की प्यास ने आबेहयात माँगा है,
अगर मुझे न मिली तुम तो मैं ये समझूँगा,
कि दिल की रह से होकर खुशी नहीं गुजरी,
कि सिर्फ उम्र कटी जिन्दगी नहीं गुजरी,

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