Friday, 9 December 2016

चेहरे पे खुशी छा जाती है, आँखों में सरूर आ जाता है,
जब तुम मुझे अपना कहते हो,अपने पे ग़रूर आ जाता है,
तु हुश्न की खुद एक दुनिया हो,शायद ये तुम्हें मालूम नहीं,
महफिल में तु्म्हारे आने से, हर चीज पे नूर आ जाता है,
हम पास से तुमको क्या देखें तुम जब भी मुकाबिल होते हो,
बेताब निगाहों के आगे, परदा सा जरूर आ जाता है,
जब हमने मोहब्बत की तुमसे तब जा के कहीं ये राज़ खुला,
मरने का सलीक़ा आते ही, जीने का शऊर आ जाता है,
चेहरे पे खुशी छा जाती है,आँखों में सरूर आ जाता है,
जब तुम मुझे अपना कहते हो,अपने पे ग़रूर आ जाता है,

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