देखा तो था,यूँ ही किसी ग़फलत- शिआर(1) ने
दिवाना कर दिया दिल-ए-बेइख्तीयार ने
दिवाना कर दिया दिल-ए-बेइख्तीयार ने
ऐ आरजू के धूंधले ख्वाबों जवाब दो ?
फिर किसकी याद आयी थी मुझको पुकारने
फिर किसकी याद आयी थी मुझको पुकारने
तुमको खबर नहीं मगर इक सादालौह (2)को
बर्बाद कर दिया तिरे दो दिन के प्यार ने
बर्बाद कर दिया तिरे दो दिन के प्यार ने
मै और तुमसे तर्के मोहब्बत( 3) की आरजू
दिवाना कर दिया हैं गम-ए-रोज़गार(4) ने
दिवाना कर दिया हैं गम-ए-रोज़गार(4) ने
अब ए-दिल-ए तबाह! तिरा क्या ख्याल हैं
हम तो चले थे काकुले-गेती स॔वारनें
हम तो चले थे काकुले-गेती स॔वारनें
1लापरवाही 2 -सरल स्वभाव 3 त्याग 4 स॔सारिक दुःख 5 स॔सार के केश
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