Friday, 9 December 2016

आज सजन मोहे अंग लगा लो,
जनम सफल हो जाए,
ह्रदय की पीड़ा देह की अगनी, 
सब शीतल हो जाए,
किए लाख जतन,मेरे मन की तपन,
मोरे तन की जलन नहीं जाए,
कैसी लागी ये लगन,कैसी जागी ये अगन,
जिया धीर धरन नहिं पाए,
प्रेम सुधा इतनी बरसा दो,
जग जलथल हो जाए,
आज सजन मोहे अंग लगा लो,
जनम सफल हो जाए,
कई जुगों से हैं जागे,मोोरे नैन अभागे,
कहीं जिया नहीं लागे बिन तोरे,
सुख दीखे नहीं आगे,दुख पीछे-पीछे भागे,
जग सूना-सूना लागे बिन तोरे,
प्रेम सुधा,ओ मेरे साँवरिया,
प्रेम सुधा इतनी बरसा दो,
जग जलथल हो जाए,
आज सजन मोहे अंग लगा लो,
जनम सफल हो जाए,
मोहे अपना बना लो,मोरी बाँह पकड़,
मैं हूँ जनम-जनम की दासी,
मोरी प्यास बुझा दो,मनहर गिरधर,
मैं हूँ अन्तरघट तक प्यासी,
प्रेम सुधा,ओ मेरे साँवरिया,
प्रेम सुधा इतनी बरसा दो,
जग जलथल हो जाए,
आज सजन मोहे अंग लगा लो,
जनम सफल हो जाए,

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