मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं,
यूँ जा रहे हैं जैसे, हमें जानते नहीं,
यूँ जा रहे हैं जैसे, हमें जानते नहीं,
अपनी गरज थी जब तो लिपटना कबूल था,
बाँहों के दायरे में सिमटना कबूल था,
बाँहों के दायरे में सिमटना कबूल था,
अब हम मना रहे हैं मगर मानते नहीं,
मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं,
मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं,
हमने तुम्हें पसंद किया क्या बुरा किया,
रुतबा ही कुछ बुलंद किया क्या बुरा किया,
रुतबा ही कुछ बुलंद किया क्या बुरा किया,
हर इक गली की खाक तो हम छानते नहीं,
मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं,
मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं,
मुँह फेर के न जाओ हमारे क़रीब से,
मिलता है कोई चाहनेवाला नसीब से,
मिलता है कोई चाहनेवाला नसीब से,
इस तरहा आशिकों पे कमां तानते नहीं,
मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं,
मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं,
यूँ जा रहे हैं जैसे, हमें जानते नहीं,
मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं,
मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं,
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