Tuesday, 8 November 2016

चली गोरी पी से मिलन को चली,-2
नैना वावरिया ,
मन में साँवरिया,
चली गोरी पी से मिलन को चली,
डार के कजरा लट बिखरा के,
ढ़लते दिन को रात बना के,
कंगना खनकाती,
बिन्दिया चमकाती,
छम-छम डोले,सजना की गली,
चली गोरी पी से मिलन को चली,
कोमल तन है,सौ बल खाया,
हो गई बैरन अपनी ही छाया,
घूँघट खोले ना,
मुँख से बोले ना,
राह चलत सँभली-सँभली,
चली गोरी पी से मिलन को चली,

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