Thursday, 3 November 2016

मैं अभी मरा नहीं
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जिंदगी से उन्स है,
हुश्न से लगाव है,
धड़कनों में आज भी,
इश्क का अलाव है,
दिल अभी बुझा नहीं,
रंग भर रहा हूँ मैं,
खाका-ए-हयात में,
आज भी हूँ मुन्हमिक,
फिक्र-ए-कायनात में,
ग़म अभी लुटा नहीं,
हर्फ़े - हक़ अज़ीज है,
ज़ुल्म नागवार है,
अहदे-नौ से आज भी,
अहद उस्तवार है,
मैं अभी मरा नहीं,
(साहिर लुधियानवी)
(उन्स-प्रेम, खाका -ए -हयात-जीवन चित्र,मुन्हमिक-व्यस्त, फ़िक्रे-कायनात, जग की चिंता, हर्फे-हक़-सत्य बात,अज़ीज-प्रिय, नागवार-अप्रिय, अहदे-नौ-नये युग, अहद-वचन,वादा,उस्तवार-दृढ़, पक्का,)

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