Tuesday, 8 November 2016

मैं जागूँ सारी रैन,
सजन तुम सो जाओ,
गीतों में छुपा लो बैन,
सजन तुम सो जाओ,
साँझ ढ़ले से भोर भए तक,
जाग के जब कटतीं हैं घड़ियाँ,
मधुर मिलन की ओस में बसकर,
खिलतीं हैं जब जीवन कलियाँ,
आज नहीं वो रैन,
सजन तुम सो जाओ,
फीकी पड़ गयी चाँद की ज्योती,
धुँधले हो गए दीप गगन के,
सो गई सुंदर सेज की कलियाँ,
सो गए खिलते भाग दुल्हन के,
खुल कर रो लेँ नैन,
सजन तुम सो जाओ,
जाग के सो गई तन की अग्नि,
बढ़ के थम गई मन की हलचल,
अपना घूँघट आप उलटकर,
खोल दी मैंने पाँव की पायल,
अब है चैन ही चैन,
सजन तुम सो जाओ,

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