एक से बढ़कर एक शानदार 'तोरा मन दरपन कहलाए, मन रे तू काहे न धीर धरे, मेरे रोम रोम में बसने वाले राम , मेरी सुन ले अरज बनवारी, जैसे भजन साहिर की जादुई कलम से निसृत हुए हैं। आज सुबह की शुरुआत सन 1974 में आई फिल्म 36 घंटे के इस खूबसूरत भजन से करते हैं।
तीन लोक पर राज तिहारा
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तीन लोक पर राज तिहारा
चार खूंट तोरा धाम रे
तू जो करे सो होय
दूजा करे न कोय
रखियो नजर श्रीराम रे
प्रभु तुमरे हाथ हजार
सदा रखियो लाज हमार
तुम हो जगत के स्वामी
हम हैं मूरख अज्ञानी
गिरने लगे तो लीजो थाम रे
रखियो नजर श्रीराम रे
तोरी रचना सब संसार
तोरी लीला अपरम्पार
संकट को टारे तू ही
डूबे उभारे तू ही
दुखभंजन तेरो नाम रे
रखियो नजर श्रीराम रे
तीन लोक पर राज तिहारा
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तीन लोक पर राज तिहारा
चार खूंट तोरा धाम रे
तू जो करे सो होय
दूजा करे न कोय
रखियो नजर श्रीराम रे
प्रभु तुमरे हाथ हजार
सदा रखियो लाज हमार
तुम हो जगत के स्वामी
हम हैं मूरख अज्ञानी
गिरने लगे तो लीजो थाम रे
रखियो नजर श्रीराम रे
तोरी रचना सब संसार
तोरी लीला अपरम्पार
संकट को टारे तू ही
डूबे उभारे तू ही
दुखभंजन तेरो नाम रे
रखियो नजर श्रीराम रे
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