मुल्क में बच्चों की ग़र सरकार हो,
जिन्दगी एक ज़श्न एक त्योहार हो,
जिन्दगी एक ज़श्न एक त्योहार हो,
हुक्म दें ऐसे कैलेण्डर के लिए,
जिसमें दो दिन बाद एक इतवार हो,
जिसमें दो दिन बाद एक इतवार हो,
सबको दें स्कूल जैसा यूनीफार्म,
एक सी हर पैंट हर शलवार हो,
एक सी हर पैंट हर शलवार हो,
हॉस्टल तामीर हों सबके लिए,
कोई भी इंसां न बेघरवार हो,
कोई भी इंसां न बेघरवार हो,
राष्ट्रभाषा हम इशारों को बनाएं,
दक्खिन उत्तर में न फिर तकरार हो,
दक्खिन उत्तर में न फिर तकरार हो,
हम मिनिस्टर हों तो वो सिस्टम बनें,
जिसमें मुफ़लिस हो न साहूकार हो,
जिसमें मुफ़लिस हो न साहूकार हो,
क़ौमी दौलत से खजाने हो भरे,
खुद ही ले ले जिसको जो दरकार हो,
खुद ही ले ले जिसको जो दरकार हो,
ईद दीवाली सभी मिल के मनाएं,
आदमी को आदमी से प्यार हो,
आदमी को आदमी से प्यार हो,
मुल्क में बच्चों की ग़र सरकार हो,
जिन्दगी एक ज़श्न एक त्योहार हो,
जिन्दगी एक ज़श्न एक त्योहार हो,
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