बिक गए जब तेरे लब,
तो तुझको क्या शिकवा अगर,
जिन्दगानी बाद-ओ-सागर
से बहलाई गई,
तो तुझको क्या शिकवा अगर,
जिन्दगानी बाद-ओ-सागर
से बहलाई गई,
ऐ ग़म-ए-दुनियाँ तुझे
क्या इल्म तेरे वास्ते,
किन बहानों से तबीयत
राह पे लाई गई,
क्या इल्म तेरे वास्ते,
किन बहानों से तबीयत
राह पे लाई गई,
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