Thursday, 3 November 2016

क्यों कोई मुझको याद करे...मसरूफ़ ज़माना मेरे लिए क्यों वक्त अपना बर्बाद करे... मैं पल दो पल का शायर हूँ लिखने वाले साहिर वास्तव में कालजयी शायर है। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज भी एफ एफ पर पुराने बजने वाले प्रतिशत गीत उनके ही लिखे हुए होते हैं।

किसका रस्ता देखे, ऐ दिल! ऐ सौदाई
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किसका रस्ता देखे, ऐ दिल! ऐ सौदाई!
मीलों है खामोशी, बरसों है तन्हाई 


भूली दुनिया कभी की, तुझे भी मुझे भी
फिर क्यों आँख भर आई
किसका रस्ता देखे ...
कोई भी साया नहीं राहों में
कोई भी आएगा न बाहों में
तेरे लिए, मेरे लिए कोई नहीं रोने वाला,
झूठा भी नाता नहीं चाहों में
तू ही क्यों डूबा रहे आहों में
कोई किसी संग मरे, ऐसा नहीं होने वाला
कोई नहीं जो यूँ ही जहाँ में बाँटे पीर पराई

किसका रस्ता देखे ...

तुझे क्या बीती हुई रातों से
मुझे क्या खोई हुई बातों से
सेज नहीं, चिता सही जो भी मिले सोना होगा,
गई जो डोरी छूट हाथों से
लेना क्या छूटे हुए साथों से
खुशी जहाँ माँगी तूने, वहीं मुझे रोना होगा
न कोई तेरा, न कोई मेरा, फिर किसकी याद आई
किसका रस्ता देखे ...


( जोशीला -1973)

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