Thursday, 3 November 2016

रात भर का है मेहमां अंधेरा,
किसके रोके रुका है सवेरा,
रात जितनी ही संगीन होगी,
सुबह उतनी ही रंगीन होगी,
ग़म न कर ग़र है बादल घनेरा,....
लब पे शिकवा न ला अश्क पी ले,
जिस तरह भी हो कुछ देर जी ले,
अब उखड़ने को है ग़म का डेरा,...
यूँ ही दुनिया में आकर न जाना,
सिर्फ आँसू बहाकर न जाना,
मुस्कराहट पे भी हक़ है तेरा,...

No comments:

Post a Comment