मेरी सुन ले अरज वनबारी,
तेरे द्वार खड़ी दुखियारी, - 2
तेरे द्वार खड़ी दुखियारी, - 2
आर न सूझे,पार न सूझे,
अब कोई दूजा द्वार न सूझे,
कौन ठिकाने जाऊँ प्रभू जी,
छोड़ के शरन तिहारी,
अब कोई दूजा द्वार न सूझे,
कौन ठिकाने जाऊँ प्रभू जी,
छोड़ के शरन तिहारी,
तेरे द्वार खड़ी दुखियारी, - 2
मेरी सुन ले अरज वनबारी,
मेरी सुन ले अरज वनबारी,
छिन गया मेरी आँख का मोती,
खो गई इन नैनन की ज्योती,
तेरे जगत में भटक रही हूँ,
मैं ममता की मारी,
खो गई इन नैनन की ज्योती,
तेरे जगत में भटक रही हूँ,
मैं ममता की मारी,
तेरे द्वार खड़ी दुखियारी, - 2
मेरी सुन ले अरज वनबारी,
मेरी सुन ले अरज वनबारी,
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